
अब पूरा मामला जातियों के गुणा-भाग पर टिका है। दो विकल्पों पर सबसे ज्यादा चर्चा है। एक, प्रदेश नेतृत्व के तमाम विरोध को दरकिनार कर शेखावत की ताजपोशी करा दी जाए। दूसरा, केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व के बीच सहमति के जरिए कोई ऐसा नाम तय किया जाए जो करीब 6 महीने बाद विधानसभा चुनावों के गणित में फिट बैठता हो। राजपूत के अध्यक्ष न बनने से जाट की दावेदारी तो स्वत: ही खत्म हो जाती है ऐसे में ब्राह्मण, वैश्य व मूल ओबीसी ही
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